जांजगीर-चांपा में हाय-हाय के नारों से गूंज रहा

जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर के कचहरी चौक के पास विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत और जिला पंचायत सीईओ अजीत बसंत होश में आओ, हाय-हाय के नारों से गूंज रहा है। अपने साथ हुई बदसलूकी के खिलाफ पत्रकारों की यह लड़ाई बीते दस दिनों से जारी है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। इसके बावजूद जोश-खरोश के साथ पत्रकार अपनी दो सूत्रीय जायज मांगों को लेकर डटे हुए हैं।आपकों बता दें कि रायपुर में ंराजीव अग्रवाल ने पत्रकारों के धरना स्थल पहुंचकर न केवल माफी मांगी, बल्कि सात दिनों के भीतर निलंबन की कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। इस पर रायपुर में पत्रकारों ने अपना आंदोलन सात दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। इसके बाद प्रदेेश भर के लोगों की निगाहें जांजगीर के आंदोलन में टिकी हुई है। हालांकि आंदोलन खत्म कराने प्रशासन और कांग्रेसी कड़ी मशक्कत कर रहे हैं, लेकिन जांजगीर के पत्रकार अपनी दो सूत्रीय मांग विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत और जिला पंचायत सीईओ अजीत बसंत अपनी भूल स्वीकार करते हुए माफी मांगने की जिद पर अडे़ हैं। ऐसे में कांग्रेस के अलावा प्रशासन को समझ नहीं आ रहा है कि पत्रकारों का यह आंदोलन कैसे खत्म हो।

इधर, अनिश्चितकालीन आंदोलन के तीसरे दिन कचहरी चौक जांजगीर में पत्रकारों ने विस अध्यक्ष और जिला पंचायत सीईओ के खिलाफ जमकर दहाड़ लगाई। पत्रकारों ने धरना को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। इसके बावजूद संवैधानिक पद पर आसीन विस अध्यक्ष डॉ. महंत का पत्रकारों के प्रति यह व्यवहार घोर निदंनीय है। उन्होंने कहा कि जिस तरह डॉ. महंत ने जाज्वल्यदेव के मंच से कहा कि आप यहां से चले जाओ, हमें आपकी जरूरत नहीं है इस तरह के बिगड़े बोल की उम्मीद विशेषकर डॉ. महंत से नहीं थी। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत सीईओ अपनी मनमानी के लिए जाने जाते हैं। वो अपने इसी उटपटांग हरकत को लेकर हमेशा अपने मातहतों के अलावा जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि व पत्रकारों के बीच विवादित रहे हैं। पत्रकारों ने यह भी कहा कि जिस तरह कलेक्टर नीरज बनसोड़ और एसपी आरएन दास ने पूर्व में पत्रकारों से चर्चा करते हुए पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी लेते हुए खेद प्रकट किया था, लेकिन अपने उच्चाधिकारियों के इस बड़प्पन का जिला पंचायत सीईओ को कोई असर नहीं हुआ। पत्रकारों ने कहा कि सुनने में यह भी आ रहा है कि जिला पंचायत सीईओ अपनी भूल स्वीकार करने किसी भी कीमत पर तैयार नहीं है, भले ही इसके लिए उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई की जाए वो तैयार है। इससे समझा सकता है कि जिले में जिला पंचायत सीईओ की मनमानी किस कदर हावी है।जिपं सीईओ से सभी त्रस्तआपकों बता दें कि जिला पंचायत सीईओ से न केवल उनके मातहत, पंचायत प्रतिनिधि व पत्रकार त्रस्त है, बल्कि जिले के जनप्रतिनिधि भी उनसे खुश नहीं है। बताया जाता है विभिन्न मामलों में जिला पंचायत सीईओ उनकी नहीं सुनते। इसके बावजूद जनप्रतिनिधि हाथ मलते रह जा रहे हैं।

खबर यह भी है जाज्वल्देव लोक महोत्सव के शुभारंभ के दौरान कुछ कांग्रेस नेताओं की भी जिला पंचायत सीईओ से कहा-सुनी हुई थी। जाहिर है अपने करीब दो साल के कार्यकाल में जिला पंचायत सीईओ काफी विवादित रहे हैं। यही वजह है कि सभी जिला पंचायत सीईओ का यहां से तबादला चाह रहे हैं। इतनी शिकायत के बावजूद शासन का जिला पंचायत सीईओ को संरक्षण मिलना सरकार के प्रति लोगों के आक्रोश की परीक्षा लेना है। बहरहाल, पत्रकारों के इस धुआंधार आंदोलन से जिले की व्यवस्था में बदलाव निश्चित है।

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