युवाओं ने जाना लव और मेडिटेशन के बीच का तालमेल

भिलाई नगर । अपने व्यस्तम जीवन में काम के साथ-साथ प्यार और मेडिटेशन में कैसे तालमेल बैठाएं यह बताने ओशो मेडिटेशन रिसोर्ट पूणे से आई मां अमृत साधना ने कार्यशाला में कई बातें बताई। उन्होंने ध्यान और प्यार को जीवन का जरूरी हिस्सा बताते हुए प्यार करने कारणों और तरीके को भी समझाया। सीए ब्रांच भिलाई में हुए इस कार्यक्रम में सीए स्टूडेंट् सहित कई कोचिंग क्लास के छात्र एवं शिक्षक मौजूद थे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जब तक खुद से प्यार नहीं करेगा, वह दूसरों को कभी प्यार नहीं दे सकता। उन्होंने युवाओं को अपने कॅरियर और पढ़ाई के बीच प्रेम को जोडऩे के तरीके बताए। इस दौरान उन्होंने मेडिटेशन के जरिए भी उन्हें प्यार की अनुभूति कराई और कहा कि हद्य में जब प्यार छलकेगा तभी वह दूसरों तक पहुंचेगा, इसलिए जरूरी है कि पहले खुद से प्यार करना सीखें।

पहचानना जरूरी

वर्कशाप में प्रवक्ता मां अमृत साधना ने कहा कि प्यार को पहचानना जरूरी है, कि हमें किसी से प्यार है या नहीं फिर वह हमारा अपना कॅरियर, पढ़ाई या कोई काम क्यों न हो। जिस काम को करने में हमें सबसे ज्यादा मजा आता है तो समझ लिजीए कि उसमें प्रेम छिपा है, लेकिन जब यही काम बोझ लगने लगे और तनाव देता जाए तो उस काम से हट जाना ही बेहतर होता है।

प्रेम को देखने का नजरिया गलत

उन्होंने कहा कि प्यार की व्याख्या अक्सर गलत की जाती है, यहां प्यार का मतलब एक लड़का और लड़की से जोड़कर देखा जाता है। समाज शादी को उभारता है और प्यार को दबाता है, लेकिन लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि प्रेम आत्मा का भोजन है और बिना इसके आत्मा अतृप्त है। ओशो ने भी यही कोशिश की है कि वैज्ञानिक तरीके से मन की सफाई कर उसमें खुशियां भरी जाएं। ओशो एक सुखवादी और जीवनवादी सोच है।

कार्यक्रम में शाखा अध्यक्ष सीए पीयूष जैन, सिकासा अध्यक्ष सीए नितिन लुनिया, सीए अंकेश सिन्हा, सीए सौरभ गोयल सीए भूषण चिपडे, देव स्पोकन और एबीएस के 100 से ज्यादा छात्र छत्राओं ने इस कार्यशाला में सम्मिलित हो इसे सफल बनाया।

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