पशुधन विकास विभाग में डॉक्टरों का टोटा

कोरबा। पशुधन विकास विभाग में चिकित्सकों की कमी के कारण पशुओं के इलाज के लिए महज औपचारिकता का निर्वहन हो रहा है। जिले के 15 पशु औषधालय में चिकित्सक के सात पद रिक्त हैं। ऐसे में किसानों को विभागीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कृषि कार्यों में मशीनीकरण हावी होने के कारण चलते भैंस व गोवंशीय पशुओं की तादाद में कमी आने लगी है। उस पर औद्योगिक जिले में सिमटते चारागाह से पशु पालन का कार्य प्रभावित हुआ है। पहले घर-घर गाय पाली जाती थी। कृषि कार्य के लिए बैलों के लिए घर में अलग से पैगोडा होता था, जो अब घरों में नहीं के बतौर है। पशुओं की चिकित्सा सुविधा का विस्तार तो हुआ, किंतु चिकित्सालयों में अपेक्षित चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने से विभागीय योजनाओं का लाभ मवेशी पालक किसानों को नहीं मिल पा रहा है।

पशुधन विकास विभाग से न केवल पशुओं का इलाज बल्कि दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन, शूकर पालन, कुक्कुट उद्योग जैसी योजनाओं का संचालन किया जाता है। चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने से किसानों को अपेक्षित जानकारी नहीं मिल पाती है। पशु औषधालय करतला, पोड़ी-उपरोड़ा, कोरबा, पाली, कटघोरा, श्यांग, हरदीबाजार, बांकीमोंगरा, भैसमा व कुदमुरा में संचालित है। संचालित प्रमुख केंद्रों के अलावा सहायक चिकित्सा केंद्र भी संचालित हैं, जहां सहायक चिकित्सा विस्तार अधिकारी की नितांत कमी है। मौसमी रोग निवारण, पशुधन टीकाकरण जैसी योजना को सही दिशा दशा नहीं मिल रही है।

जिला पशुधन विकास विभाग से डेयरी योजना संचालित है। इसमें 12 लाख लागत तक ऋण प्रदान करने का प्रावधान है। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी की भी योजना है। चिकित्सकों की कमी के कारण आम लोगों को योजना की जानकारी नहीं मिल पा रही है। अब तक डेयरी उद्योग के लिए एक भी आवेदक को ऋण की स्वीकृति नहीं मिली है।
संकरण पशुपालन में प्रगति नहीं

शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं में पशुधन विकास विभाग में विशेष पशु पालन योजना संचालित है। इसमें संकरण प्रजाति के पशु पालन को बढ़ावा दिया जाना है। कृत्रिम गर्भाधान योजना के तहत बछिया पैदा होने पर 15 हजार रुपये अनुदान की योजना है। जिले में मात्र 20 किसानों को ही योजना लाभ मिल सका है।

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