शिक्षा मंत्री ने औपचारिक रूप से निपटा दी समीक्षा बैठक

बिलासपुर । जिला प्रशासन में मंत्रियो कि समीक्षा बैठको का दौर शुरू हो गया है इस हफ्ते 3 बड़े विभाग कि बैठके हुई जिसमे ग्रामीण विकास स्वास्थ के साथ शिक्षा विभाग मुख्य है। स्कूली शिक्षा मंत्री कि समीक्षा बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण थी किन्तु औपचारिकता में निपट गई,सरकार ने शिक्षाकर्मियों को खुले हाथ झोली में वह सब दिया जिसकी अपेक्षा वो करते थे अब सरकार कि लेने कि बारी है,स्कूली शिक्षको का दायित्व भी यही बनता है कि वे अपने कर्तव्य स्थान पर बिना किसी हिला हवाले के पुरी मुस्तैदी से बच्चो का भविष्य निर्माण करे किन्तु ऐसा हो नही रहा है शिक्षा का आधा सत्र बित चुका है और विधानसभा चुनाव के चलते पूरा डेढ़ माह कुर्बान हो गया फिल्हाल लोकसभा चुनाव के सक्षिप्त पूर्णनिरिक्षण का काम चल रहा है इसमें भी शिक्षको का मूल्यावान समय लग रहा है इससे भी कक्षाओं का नुकशान हो रहा है जब शिक्षाकर्मी हड़ताल पर थे तब उन्होंने पालको को इस बात का भरोसा दिया था कि हड़ताल से पढ़ाई का जो नुकशान हुआ है उसकी भरपाई अतिरिक्त पढ़ाई से कराई जाएगी किन्तु शिक्षाकर्मी अपने इस वादे पर खरे नही उतरे,बिलासपुर जिले में कई कलेक्टर आए और गए सभी कि प्राथमिकता में शिक्षा प्रमुख पायदान पर था उसके बाउजुद स्कुलो में शिक्षा कि गुणवत्ता सुधरने का नाम नही ले रही,उच्चतम न्यायालय के आदेशो के चलते कलेक्टर शिक्षा से ज्यादा ध्यान मिड डे मिल एवं उसके मेन्यु कार्ड पर देते है स्कूल का शिक्षक अपने पाठ्यक्रम पर मेंहनत करने के बदले एसएचजी और खाना पकाने कि पद्धति पर ध्यान देता है जिले के प्रत्येक ब्लाक में न्यूनतम गुणवत्ता वाले स्कूल है। जिन्हें खुले शब्दों में डी-श्रेणी का कहा जाता है यह स्थिति तब मिलती है जब स्कूल का रिजल्ट लगातार चार साल खऱाब होता है सरकार माध्यमिक शिक्षा मिशन के द्वारा करोडो रूपए शिक्षा क्षेत्र में खर्च कर रही है किन्तु इस खर्च का परिणाम भौतिक रूप से भले ही दिखाई दे किन्तु शिक्षा के स्तर में नही दिखाई देता है ।

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