लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने पिंजरा तोड़कर ही लिया दम, अब हुए आजाद परिंदा, 9 दिन बाद लौटी सबकी होठों में मुस्कान…

रायपुर| लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने आख़िरकार पिंजरा तोड़कर ही दम लिया. अब वे एक आजाद परिंदा की तरह महसूस कर रहे हैं. सभी विद्यार्थियों के होठों में 9 दिन बाद मुस्कान लौटी है. बता दें कि हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में लगभग 188 घंटो के आंदलोन तथा देशभर के लोगो से सकारात्मक मान्यता प्राप्त होने के बाद आखिर छात्रों कि मांगो को लिखित आश्वासन मिला। राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आने के बाद और शशि थरूर जैसे विख्यात व्यक्तियोँ से समर्थन बटोरने का ये सिलसिला 27 अगस्त देर रात शुरू हुआ था। लाइब्रेरी टाइमिंग में छूट, वार्डनों तथा प्रतिनिधियों के तुग़लकी राज से मुक्ति, भ्रष्टाचार तथा योन शोषण जैसे गंभीर कानूनन जुर्मों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के साथ कुल 14 मांगो कि सूची पर 4 सितंबर के दिन, विश्विद्यालय के कुलपति, छात्रों तथा छत्तीसगढ़ के विधि मंत्री के बीच गंभीर चर्चा हुई। इस चर्चा का परिणाम यह था कि कुलपति जी ने मांगो को पूरी करने का लिखित आश्वासन दिया। हाथों हाथ लाइब्रेरी 3 बजे तक खुले रखने एवं सेक्सुअल हरासमेंट और भ्रष्टाचार कि शिकायत कि जांच पड़ताल करने हेतु 2 आंतरिक समितियों के गठन का आदेश दिया। इन समितियों के सदस्यों के चुनाव तथा कार्यशैली पर एक विवरण छात्र इस महिने की 7 तारीख तक कुलपति को सौपेंगे। रात को भोजनालय चालू रखने की भी बात जी गयी है। एक और बड़ी वृद्धि ये हुई कि विश्वविद्यालय के ऑडिट कि रिपोर्ट आज पब्लिक की गई। 8 दिन से आंदोलन पर बैठे नवोदित क्रांतिकारियों के लिए यह एक बड़ी जीत साबित हुई। विश्वविद्यालय के 900 छात्र छात्राएं जो दिन रात एक कर, एक जुट होकर इस आंदोलन का हिस्सा बने बैठे थे, कुलपति के इस आदेश से अभिभूत हो गए। 9 दिनों में पहली बार इन आंदोलनकारियों के चेहरों पर मुस्कान दिखी और इनके बीच जश्न का माहौल बना। कुलपति कि ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद, छात्र शेष मांगो कि पूर्ति के लिए आशाजनक हैं.

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