जैसा कहा, वैसा किया- अब बस्तर नक्सली नहीं, हुनरमंदों की फौज कर रहा है तैयार

बस्तर| कभी देश के नक्शे में लाल आतंक के गढ़ के रूप में पहचाने गए बस्तर की उजली तस्वीर सामने आई है. ये तस्वीर है कौशल उन्नयन के क्षेत्र में हुए क्रांतिकारी बदलाव की. ये तस्वीर है कि आसमां को छूने की एक नई उम्मीद की. ये तस्वीर है सपने को पूरी करने की. ये तस्वीर है- विकास की. ये उस विकास की तस्वीर है, जिसने बस्तर की सूरत बदली. बस्तर को देश में पहचान दिलाई. इस पहचान ने ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दंतेवाड़ा आने पर मजबूर कर दिया. हम बात कर रहे हैं कि उस बस्तर की, जिसे अब एजुकेशन हब के नाम से जाना जाता है, लेकिन बस्तर का बदला जाना यूं ही नहीं हुआ. यह मुमकिन हुआ है मुख्यमंत्री डाॅ.रमन सिंह की उस जिद से, जिसने हालात को बदलने का बीड़ा उठाया था. यह जिद ही थी कि बस्तर ने लाल आतंक के खौफ की बजाए संभावनाओं वाले बस्तर को देश से रूबरू कराया था. रमन ने जैसा कहा-वैसा किया. अब बस्तर नक्सली नहीं, बल्कि हुनरमंदों की फौज तैयार कर रहा है.
मुमकिन था बस्तर जैसे सुदूर अंचल से निकला हर युवा लाल आतंक का हिस्सा बन जाता. उसके हाथों में हथियार होता और लोकतंत्र के खिलाफ आवाज मुखर होती. मौजूदा दौर में ये महज एक कल्पना है, लेकिन लगभग एक दशक पहले के हालात कुछ ऐसे ही थे. आज बस्तर समेत पूरा प्रदेश बदल गया है. मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की एक सार्थक पहल ने बस्तर की लाल आतंक की छवि हटाई और हुनरमंदों को तैयार करने वाले जिले के रूप में देश में एक पहचान दी. इस पहल का नाम है – लाइवलीहुड कालेज. जहां इलाके के युवाओं की रूचि के मुताबिक उन्हें प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार दिया जाता है. सरकार ने कौशल विकास का नारा दिया, तो इसकी शुरूआत बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के एक गांव जवांगा से की. धीरे-धीरे कौशल विकास ने प्रदेश के कोने-कोने में युवाओं को जिंदगी का बड़ा मकसद दिया. आज सुदूर दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर जैसे अंचल में लोग अपनी आजीविका के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं. ऐसा ही एक समूह है, जिसका है दुर्गा स्वसहायता समूह. ये वो महिलाएं है, जो नक्सली आतंक को छोड़कर आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुकी हैं. सुकमा जिले के इन आत्मसमर्पित महिलाओं ने लाइवलीहुड कॉलेज से प्रशिक्षण लेकर अपना स्वसहायता समूह तैयार किया और जिला प्रशासन के सहयोग से कैंटिन खोला. समूह की अध्यक्ष सुशीला कहती है कि वे आज आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है, रोजगार भी है और दूसरों को तैयार भी कर रही हैं.
ऐसा नहीं है कि कौशल विकास से आत्मसमर्पित नक्सलियों की ही जिंदगी नहीं संवर रही है , बल्कि माओवाद प्रभावित जिलों की युवक-युवती और महिलाएं भी लाइवलीहुड से अलग-अलग कार्यों का प्रशिक्षण ले आर्थिक रूप से सम्पन्न बन रही हैं. वे अपने परिवार को आर्थिक संकट से उबार रही हैं. ऐसी ही महिला है नेहा और शायरा बानो. दोनों ने आजाविका मिशन कॉलेज से सिलाई-कढ़ाई के कार्य का प्रशिक्षण लिया और आज दोनों के पास अपना खुद का रोजगार है. नेहा कहती है कि पति की कमाई से घर का खर्च पूरा नहीं हो पाता था, लिहाजा जब उन्हें सरकार की लाइवलीहुड कॉलेज के बारे में पता चला तो उन्होंने खुद को इस मिशन से जोड़ना बेहतर समझा. आज उनके पास अपना खुद काम है और आर्थिक संकट भी अब खत्म हो रही है. नेहा की तरह ही शायरा बानो ने भी सिलाई का प्रशिक्षण लेकर स्व राजोगार के लिए खुद को तैयार की और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी निभाने में सहयोग कर रही हैं.
छत्तीसगढ़ ने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए हुनरमंद बनाने शुरुआत की और कौशल विकास का अधिकार दिया. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की कोशिशों की बदौलत अब युवाओं के कौशल उन्नयन का छत्तीसगढ़ मॉडल देश को नई दिशा दिखायी है. भारत सरकार ने भी इसे अपनी कौशल विकास नीति में शामिल किया है और प्रदेश के युवा आज प्रशिक्षण के साथ रोजगार भी पा रहे हैं. छत्तीसगढ़ के युवाओं को नौकरी की तलाश में अब परदेस जाने की जरूरत नहीं पड़ती और ना ही मोटी फीस चुकता कर कौशल विकास के गुर सीखने की, क्योंकि आदिवासी बहुल इस प्रदेश में कौशल उन्नयन के जरिए सबको रोजगार मूलक काम सीखाये जा रहे हैं. साथ ही रोजगार भी मुहैया कराए जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ के लाइवलीहुल कॉलेज के मॉडल ने देश के अन्य राज्यों को भी नई राह दिखायी है. इस लाइवलीहुड कॉलेज की सफलता इसी बात से समझी जा सकती है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह की सरकार ने दंतेवाड़ा से शुरू हुई मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना को पूरे प्रदेशभर में पहुंचा दिया है. ये सफलता देखने दूसरे राज्यों के प्रतिनिधिमंडल भी छत्तीसगढ़ आते हैं. कौशल विकास के लिए युवाओं को बेहतर मौके और सुविधा दिलाने की ख्याति इतनी बढ़ी है की देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान यहां के मॉडल को करीब से देखा परखा और पूरे देश में इस मॉडल को लाने की कवायद शुरू की. प्रदेश के राइट टू स्कील को अन्य राज्यों में भी शुरू करने की कोशिश की जा रही है. कौशल विकास को लेकर देश में बेहतर माॅडल देने वाले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डाॅ.रमन सिंह कहते हैं कि- छत्तीसगढ़ अब रोजगार देने वाला राज्य बन गया है. प्रदेश के युवा हुनरमंद बनकर कौशल विकास के मामले में पूरे देश के युवाओं के लिए मार्गदर्शक बन रहे हैं. लोग पहले मजदूरी करने दूरदराज के प्रदेशों में जाया करते थे, पर अब राज्य का हर युवा जागरूक हो चुका है. अब वह खुद ही अपना रोजगार पैदा कर रहा है, और अपने परिवार का पेट पाल रहा है.
छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य, जिसने अपने युवाओं को उनके मनपंसद व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण पाने का कानूनी अधिकार दिया. कानूनी अधिकार देने वाला दुनिया में एक अफ्रीका और दूसरा छत्तीसगढ़ है. राज्य सरकार ने इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाकर‘छत्तीसगढ़ युवाओं के कौशल विकास का अधिकार अधिनियम 2013’ बनाया गया. इस अधिनियम के तहत प्रदेश के युवाओं को मनपंसद व्यवसायों में तकनीकी प्रशिक्षण पाने का कानूनी अधिकार मिला. इधर बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान अपने चरम पर है. इसी के तहत स्थानीय लोगों के लिए कई तरह के विकास परक योजानाएं संचालित की जा रही है. इसमें से एक बड़ा काम आजाविका मिशन से बेरोजगारी को दूर करना है. इस लिहाज से आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और पुनर्वास नीति के तहत आजाविका मिशन से प्रशिक्षण दिया जा रहा है. 2013 में महिलाओं के उत्थान के लिए आजीविका कालेज कि स्थापना कि गई थी. आज इस संसथान से लगभग तीन हजार महिलाओं ने प्रशिक्षण का लाभ लिया है, और लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं आज स्वयं का व्यवसाय चला रही हैं.

चाहे बात छत्तीसगढ़ के विकास की हो. शिक्षा की बेहतरी की हो. बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और मजदूरों की भलाई की हो या बात बेरोजगार युवाओं में जरूरी स्कील डेवलप कर प्रदेश में ही रोजगार मुहैया कराने की हो. छत्तीसगढ़ की विश्वसनीय सरकार हर जगह उम्दा काम कर रही है. मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह लाखों बेरोजगार युवाओं के सपनों को साकार करने में जी-जान से लगे हुए हैं. लाइवलीहुड कॉलेज खोल कर रमन सरकार ने बस्तर को बड़ी सौगात दिया है. यहां के युवा आज प्रशिक्षण के साथ रोजगार भी पा रहे हैं. लाइवलीहुड कॉलेज और एजुकेशन हब जैसे अभिनव प्रयासों ने छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठा पूरे देश में बढ़ाई है. नक्सल समस्या होने के बावजूद बस्तर शिक्षा, कौशल उन्नयन, सड़कों, पुल-पुलियों के निर्माण और कृषि जैसे क्षेत्रों में विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर है.

कैसे हुई शुरुआत
कौशल उन्नयन की नींव दंतेवाड़ा में साल 2010 में ही रख दी गयी थी. मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने 16 अक्टूबर 2012 को इसका औपचारिक उद्घाटन किया. इसके बाद तो कॉलेज ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा. मुख्य रूप से कौशल उन्नयन का उद्देश्य प्रदेश में बेरोजगार युवा वर्ग को उनके योग्यता, दक्षता एवं अभिरूचि के अनुसार प्रचलित व्यावसायिक ट्रेड में प्रशिक्षण दिलाया जाकर प्रतिष्ठित संस्थानों में सुनिश्चित एवं स्थायित्व जॉब दिलाकर आत्मनिर्भर बनाना है.
युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रदेश के सभी 27 जिलों में लाइवलीहुड कॉलेज खोले गए. कम पढ़े-लिखे युवाओं के कौशल उन्नयन के लिए इन कॉलेजों में विभिन्न प्रकार के लघु व्यवसायों के लिए अल्पकालीन प्रशिक्षण की सुविधा. लगभग चार वर्ष में इन सभी लाइवलीहुड कॉलेजों में लगभग तीन लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. अब तक प्रशिक्षित हुए युवाओं में से लगभग 74 हजार युवाओं को निर्माण उद्योग, फ्रेबिकेशन, सिलाई-बुनाई,कम्प्यूटर परिचालन, कम्प्यूटर हार्डवेयर और इलेक्ट्रीकल सामानों को रिपेयरिंग आदि व्यवसायों में रोजगार मिला है. वर्ष 2019 तक इन कॉलेजों में दो लाख 44 हजार से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है. लाइवलीहुड कॉलेजों के संचालन के लिए राज्य स्तरीय लाइवलीहुड कॉलेज सोसाइटी गठित. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है. जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में प्रत्येक जिले में जिला कौशल विकास प्राधिकरण कार्यरत.युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए राज्य में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कौशल विकास योजनाओं का संचालन. राज्य में 128 नये सरकारी आईटीआई खोले गए. इन्हें मिलाकर प्रदेश में शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आई.टी.आई.) की संख्या बढ़कर 172 हो गई.13200 नई सीटों के साथ इन सभी 172 शासकीय आई.टी.आई. में सीटों की संख्या 19360तक पहुंच गई. इन सभी में 34 पाठ्यक्रम संचालित. चालू सत्र 2016-17 में नौ नये आई.टी.आई.छुरा, खैरागढ़, पलारी, बास्तानार, उदयपुर,लुण्ड्रा, कटघोरा, कांसाबेल और बम्हनीडीह में खोले गए हैं. इनमें कम्प्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्राम असिस्टेंट (कोपा) पाठ्यक्रम शुरू किया गया है. राज्य निर्माण के समय वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ में सिर्फ 44 सरकारी आई.टी.आई. थे,जिनमें केवल 5960 सीटें थी. प्रथम तीन वर्ष में (वर्ष 2003 तक) 17 नये आई.टी.आई. खुले,जिनमें केवल 704 सीटों की वृद्धि हुई थी. प्रदेश में संचालित सभी शासकीय आई.टी.आई. में एक लाख 10हजार युवाओं को विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बनाया गया. कौशल उन्नयन के जरिए आज राज्य के युवा खासकर नक्सल प्रभावित इलाके युवा बस्तर में विकास की नई इबारत लिख रही है. आज लाइवलीहुड कॉलेज से हुई शुरुआत ने हर हाथ को काम दिया है. लाइवलीहुड कॉलेज ने न सिर्फ ट्रेनिंग देकर सक्षम बनाया, बल्कि प्लेसमेंट एजेंसियों की मदद से निजी व सरकारी संस्थानों में नौकरियां भी दिलाई गयी. एक आंकड़े के मुताबिक कौशल विकास के बाद दो लाख से ज्यादा युवाओं ने अपना बेहतर भविष्य गढ़ा है. रमन सरकार के नेतृत्व में युवा जिस तरह प्रगति के सोपान पर आगे बढ़ रहे है. निश्चित ही ये छत्तीसगढ़ के विकास में मिल का पत्थर साबित होगा.

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