जल संसाधन संभाग की जर्जर कालोनी,जहाँ रहता है तीन कर्मचारियों का परिवार,और लगता है, विभाग का दफ्तर

 बिलासपुर। वैसे तो जल संसाधन मंडल बिलासपुर और  संभाग में अपने नये नये कारनामों के लिये जाना जाता हैं, जैसे बगैर पर्यावरण और वन क्लियरेंस लिये एनीकट, चेकडैम, केनाल के निर्माण कार्य आरंभ कर देना, रुकावट आने पर क्लियरेंस के लिये दौड लगाना,बिना टेंडर ही वर्क आर्डर जारी कर, अपने चहेते ठेकेदार को काम दे देना और बाद में अंदर ही अंदर निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद टेंडर जारी कर देना, कभी कभी तो कुछ ऐसे काम भी कर लेता हैं जिसके लिये ना तो प्रस्ताव होता है, ना ही प्रशासकीय स्वीकृति होती है और ना ही टेंडर का प्रकाशन होता है, लेकिन अपने चहेते ठेकेदार के नाम वर्क आर्डर जारी कर निर्माण कार्य करा दिया जाता है, जिसके बाद नियम विरुध्द कार्य किये जाने पर, अधिकारी पर कार्यवाही की बजाय उनकी पीठ थपथपाई जाती है, अधिकारी गदगद होकर वाहवाही लूट लेते है और ठेकेदार की भी आमदनी हो जाती है। कई बार इनके विभागों के कामों को लेकर बडी किरकिरी होती है जैसे एनीकट, चेकडेम का निर्माण तो किसानों और ग्रामीणों के जल उपयोगिता के नाम पर कर दिया गया होता है लेकिन उसमें जल का भराव नहीं होने से किसान और ग्रामीणों के लिये अनुपयोगी साबित होता है उन्हें कोई लाभ नहीं होता,लेकिन इससे विभाग को कोई फर्क नहीं पडता ये कागजों में किसानों के जल उपयोग बतलाते रहते है, लेकिन हमारा सवाल ये है कि जल संसाधन संभाग कोटा के अंर्तगत रतनपुर के निकट मदनपुर में बरसों पहले करोडों की लागत से बनी सिंचाई कालोनी, रख रखाव और सुरक्षा के अभाव में जर्जर हो रही है परन्तु विभागीय अधिकारी उस पर ध्यान नहीं दे रहे, वहां बरसों से अस्थाई रुप में अनुविभागीय अधिकारी का दफतर संचालित किया जा रहा है। वहीं कुछ विभागीय कर्मचारी उसी जर्जर कालोनी के जर्जर मकानों में निवास करने मजबूर है। क्यों.

बिलासपुर जिले के रतनपुर मार्ग पर मदनपुर स्थित सिंचाई विभाग की कॉलोनी में वर्तमान में कोई भी कमरा ऐसा नहीं है जिसका कोई हिस्सा गिरा न हो टुटा ना हो। विभागीय अधिकारी.कर्मचारियों को जर्जर क्वाटर ढहने से हादसे की आशंका रहती है। जल संसाधन विभाग द्वारा मदनपुर अनुभागीय मुख्यालय पर उनका स्टाफ पदस्थ हैं। इनमें दो बाबू तथा एक चौकीदार ही यहां बने जर्जर भवनों में परिवार समेत रहते हैं जबकि बाकी के अधिकारी और कर्मचारियों अपने परिवार के साथ बिलासपुर में रहकर अप डाउन करते रहते है। वही मदनपुर कॉलोनी में आवासों की मरम्मत के लिए अब तक कोई बजट नहीं मिला है। जिन क्वाटरों  में ही कर्मचारी रह रहे हैं, इनकी भौतिक हालत ठीक नहीं है।

आधुनिकता के इस दौर में जल संसाधन विभाग का ये दफतर आम लोगों की नजर में हंसी का पात्र बना हुआ है कि करोडों रुपये के अरपा भैंसाझार परियोजना के एसडीओं का ऐसा दफतर जो आज भी अस्थाई दफतर के नाम पर बरसों से संचालित है। काम चल रहा है चलने दो की तर्ज पर। जिला प्रशासन सहित तमाम अधिकारी, नेता, मंत्री यहां से गुजर कर माॅ महामाया के दरबार में मत्था टेकते है, लेकिन इस जर्जर और खंण्डहर में तब्दील हो रही कालोनी के जीर्णोध्दार की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता या ध्यान नहीं देना चाहते। वैसे शासकीय नियमानुसार अक्सर जर्जर भवनों में संचालित कार्यालयों की जानकारी विभागाध्यक्षों द्वारा मंगाई जाती है लेकिन  इन भवनों को देखकर ऐसा लगता है मानों शासन के बनाये गये नियम कागजी और महज खानापूर्ती के लिये है।

जल संसाधन विभाग की इस जर्जर और खण्डहरनूमा कालोनी और दफतर को देखकर ऐसा लगता है मानों यहां बरसों से कोई नहीं रहता शायद यहां भूतों नें अपना डेरा बना लिया हो। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा यहां जल संसाधन विभाग का अस्थाई कार्यालय भी है और यहां विभाग के कुछ कर्मचारी भी निवासरत है। दरअसल ये है अरपा भैंसाझार परियोजना के नाम पर बनाई गई काॅलोनी है,लेकिन उन दिनों अरपा भैंसाझार परियोजना किसी कारणवश बन नहीं सकी तो इन कालोनियों के निर्माण में खर्च दो करोड रुपये भी चले गये। उसके बाद रख रखाव के जिम्मेदारान, विभाग नें ध्यान दिया ना सरकार नें, और अधिकारियों नें अनदेखी और लापरवाही की वजह से जल संसाधन की बनी कालोनी जर्जर होती गई और आज खंण्डहर में तब्दील हो गई है, इसके दरवाजे चौखट छत पर लगे एस्बेस्टस सब चोरी हो गये लेकिन ना तो विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों नें इस चोरी के वारदात पर कोई रिपोर्ट लिखाई। चोरी की रिपोर्ट नहीं लिखाए जाने से चोरों के हौसले बुलंद है और आज यह असामाजिक तत्वों का ऐशगाह बन गया है जानकारी के अनुसार देर रात तक यहां सरकारी शराब और देशी मुर्गा पार्टी असामाजिक तत्वों द्वारा की जाती है। खण्डहरनुमा भवनों को शराब बेचने वालों नें अवैध रुप से शराब छिपाने का अडडा बना रखा है। अधिकारी सब कुछ जानकर भी मौन हैं, पुलिस में ना तो अपराध दर्ज कराया जाता है ना इसके रख रखाव और सुरक्षा के नाम पर चौकीदार ही नियुक्त किया गया है। हाॅ लेकिन रतनपुर में उप संभागीय कार्यालय के नाम पर यहां जरुर अस्थाई कार्यालय चलाया जा रहा है यहां विभागीय दो से तीन कर्मचारी भी ले देकर निवास करते है।

 

सिचाई विभाग की इस जर्जर कालोनी के मकानों का मरम्मत धन अभाव के कारण नहीं हो पा रहा है, यहां पदस्थ आर एस यादव, अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन उप संभाग रतनपुर कहते हैं, कि कार्यालय व इस कालोनी के मरम्मत के लिये कई बार विभाग को प्रस्ताव बना कर भेजा है, राशि की मांग की गई है, लेकिन आज तक उसे विभागीय व प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में हम क्या कर सकते है।

बहरहाल अरपा भैंसाझार परियोजना आज भले ही कछुए की चाल से मुर्तरुप ले रही है लेकिन 1982 में अरपा भैंसाझार के नाम पर बनी कालोनी आज विभागीय अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही के वजह से जीर्णशीर्ण हो असामाजिक तत्वों का डेरा बन गई देखना होगा की इस कालोनी और कार्यालय के रखरखाव को लेकर विभागीय अधिकारी क्या कुछ कदम उठाते है।

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