5 रत्नों का साथ छुटा… शोक में डूबा देश, ये है वह बड़ी हस्तियां…

7 अगस्त से लेकर आज 17 अगस्त तक पिछले 10 दिनों में देश ने 5 बड़ी हस्तियां खो दी है. इन पांचों बड़ी हस्तियों ने अपने देश, अपने राज्य और अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर काम किया है. लेकिन पिछले 4 दिनों से देश के रत्नों के जाने का दौर लगा हुआ है. ये 5 रत्न वर्षों तक देश में याद किए जाएंगे. लेकिन इन रत्नों को खोने के बाद देश में शोक की लहर है.

 आइये जानते है कौन है ये 5 रत्न

तमिलनाडु के पांच बार मुख्‍यमंत्री रहे और ‘कलाईनार’ के नाम से मशहूर डीएमके के प्रेसिडेंट मुथुवेल करुणानिधि ने चेन्‍नै के कावेरी हॉस्पिटल में 94 साल की अवस्‍था में अंतिम सास ली. द्रविड़ आंदोलन की उपज एम करुणानिधि अपने करीब 6 दशकों के राजनीतिक करियर में ज्यादातर समय राज्‍य की सियासत का एक ध्रुव बने रहे. करुणानिधि यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और बुढ़ापे में होने वाली कई बीमारियों से पीड़ित थे करुणानिधि के ब्‍लड प्रेशर में गिरावट आने के कारण शनिवार रात को चेन्‍नै के कावेरी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था. शुरुआती इलाज के बाद उनका ब्‍लड प्रेशर कंट्रोल में कर लिया गया था.

लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का सोमवार 13 अगस्त को निधन हुआ. वे 89 साल के थे सोमनाथ चटर्जी पश्चिम बंगाल के अलग-अलग क्षेत्रों से दस बार लोकसभा चुनाव जीते थे. हालांकि एक बार उन्हें वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हार का सामना करना पड़ा था. पिछले महीने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष को मस्तिष्काघात के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. रविवार को सोमनाथ चटर्जी को दिल का दौरा पड़ने की वजह से हालत बिगड़ने के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया था. चटर्जी गुर्दे संबंधी समस्या से जूझ रहे थे. निधन के पहले 40 दिनों से चटर्जी का उपचार चल रहा था. दस बार लोकसभा के सदस्य रहे चटर्जी माकपा की केंद्रीय समिति के भी सदस्य रहे थे. वह 2004 से 2009 के बीच लोकसभा के अध्यक्ष रहे थे. हालांकि जब उनकी पार्टी ने यूपीए-एक सरकार से समर्थन वापस ले लिया था तो उनसे लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की मांग की गई.

14 अगस्त मंगलवार को प्रदेश ने राज्यपाल बलरामजी दास टंडन को खो दिया. छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास (बीडी) टंडन का रायपुर में निधन हो गया. 90 वर्षीय बीडी टंडन को हार्टअटैक आया था. उन्हें आनन-फानन में रायपुर के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. राज्यपाल बीडी टंडन का जन्म 1 नवंबर 1927 को हुआ था. स्व. टंडन ने 25 जुलाई 2014 को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का पदभार ग्रहण किया था. उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. इसके पश्चात वे निरन्तर सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय रहे. टंडन ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का पद ग्रहण करने के बाद से ही छत्तीसगढ़ के हित में अनेक कार्य किए. सौम्य और सरल स्वभाव के टंडन को छत्तीसगढ़ से अत्यंत लगाव था. बीडी टंडन 1953 से 1967 के दौरान अमृतसर में नगर निगम पार्षद और 1957, 1962, 1967, 1969 तथा 1977 में अमृतसर से विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए. 1997 के विधानसभा चुनाव में टंडन राजपुरा विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे. उन्होंने पंजाब मंत्रिमंडल में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के रूप में उद्योग, स्वास्थ्य, स्थानीय शासन, श्रम एवं रोजगार आदि विभागों में अपनी सेवाएं दी और कुशल प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया. टंडन 1979 से 1980 के दौरान पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे. वह जेनेवा में श्रम विभाग के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के उपनेता के रूप में शामिल हुए और सम्मेलन को संबोधित किया. उन्होंने नेपाल की राजधानी काठमांडु में सार्क देशों के स्थानीय निकाय सम्मेलन में भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया. 1975 से 1977 तक वह आपातकाल के दौरान जेल में रहे. अपनी निरन्तर सक्रियता से वह राज्य शासन के सामने जनहित के मुद्दों को सामने लाते रहे. 1991 में लोकसभा चुनाव की घोषणा ऐसे समय पर हुई थी, जब पंजाब में आतंकवाद अपनी चरम स्थिति में था. तब उन्होंने अमृतसर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव में भाग लेने का बीड़ा उठाया, जिसे उस समय सर्वाधिक आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र माना जाता था. इस चुनाव अभियान के दौरान आतंकवादियों द्वारा उन पर कई बार हमले किए गए, लेकिन सौभाग्य से टंडन सुरक्षित रहे.

15 अगस्त को देश ने क्रिकेट का वह खिलाड़ी खो दिया, जिसे अब तक का सबसे उ उम्दा लेफ्ट हैंडर बल्लेबाज कहा जाता है. पूर्व भारतीय टेस्ट कप्तान और पूर्व चीफ सिलेक्टर अजीत वाडेकर का बुधवार को 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वाडेकर लंबे समय से बीमार चल रहे थे. मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांस ली. वाडेकर अपने दौर के उम्दा लेफ्ट हैंडर बल्लेबाजों में शुमार थे. उन्होंने भारत के लिए 37 टेस्ट मैच और 2 वनडे मैच खेले. भारत ने उनकी ही कप्तानी में साल 1971 में इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के टीमों को टेस्ट में हराया था. भारतीय क्रिकेट टीम ने वाडेकर की कप्तानी में 24 अगस्त 1971 को इंग्लैंड को 4 विकेट से हराया था. यह इंग्लैंड की धरती पर भारत की पहली टेस्ट जीत थी. अजीत वाडेकर के क्रिकेट करियर की बात करें, तो उन्होंने 1958-59 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अपना डेब्यू किया था. इसके 8 साल बाद उन्हें टीम इंडिया में डेब्यू का मौका मिला. उन्होंने 1966 वेस्ट इंडीज के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू किया था. वाडेकर ने अपने होम ग्राउंड मुंबई में ही अपना टेस्ट डेब्यू किया. वाडेकर ने 37 टेस्ट की 71 पारियों में 2113 रन बनाए. अपने टेस्ट करियर में उन्होंने 1 शतक और 14 अर्धशतक जड़े.

मुंबई से हमेशा ही टीम इंडिया को उम्दा स्तर के बल्लेबाज मिलते रहे हैं और अजीत वाडेकर ने भी इसी परंपरा को बरकरार रखा था. अपने दौर के वह 3 नंबर पर खेलने वाले उम्दा बल्लेबाज थे. इसके अलावा स्लिप पोजिशन पर फील्डिंग करने में उन्हें महारत हासिल थी. वह भारत के उम्दा स्लिप फील्डर्स में शुमार थे.

16 अगस्त को देश ने भारतीय राजनीति के अजातशत्रु कहे जाने वाले बीजेपी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को खो दिया. उन्होंने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में अंतिम सांस ली. अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में तीन बार देश का नेतृत्व किया है. वे पहली बार साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, 19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक और फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी के कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता भी थे. भारतीय जनसंघ की स्थापना में भी उनकी अहम भूमिका रही. वे 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे. आजीवन राजनीति में सक्रिय रहे अटल बिहारी वजपेयी लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन भी करते रहे. वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित प्रचारक रहे और इसी निष्ठा के कारण उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया था. सर्वोच्च पद पर पहुंचने तक उन्होंने अपने संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया.

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